http://rajeshtripathi4u.blogspot.in/ Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग: अमरनाथ यात्रियों की हत्या से उठते सवाल

Tuesday, July 11, 2017

अमरनाथ यात्रियों की हत्या से उठते सवाल


क्या सचमुच भारत महाशक्ति है?
हालांकि यह आतंकवादियों से भी नहीं जीत पाया
वे आते हैं और निर्दोषों का शिकार कर चले जाते हैं
कश्मीर में रह कर महीनों रेकी करते हैं
स्थानीय लोगों की मदद के बिना ऐसा मुमकिन है क्या?
इजरायल जैसा छोटा देश आतंकवाद को कुचलने में सक्षम
हम सिर्फ बख्शेंगे नहीं, मुंहतोड़ जवाब देंगे कह कर रह जाते हैं
जो यात्री मारे गये जरा उनके घर जाकर दोहराइए सरकार ये जुमले
ना बैठक चाहिए न मंत्रणा, अब सिर्फ और सिर्फ डाइरेक्ट एक्शन ही चाहिए
कहते हैं जून में ही सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे हमले का एलर्ट दे दिया था
फिर कैसे हुई यह चूक?
लानत है उन बुद्धिजीवियों पर जो आज भी पाक से बात करने की वकालत करते हैं
जो देश आप पर बंदूक ताने है, उसे पुचकारेंगे कि भैया कृपया बात कर लो
और हां, कहां है मानवाधिकार ब्रिगेड जो आतंकियों की मौत पर मातम मनाती है
शायद इन निरीह यात्रियों की मौत उनके लिए कोई मायने नहीं ऱखती
ये मानवाधिकार का मुद्दा नहीं बन सकता है शायद
हम एक महान देश हैं बहुत ही महान
हम सरकारी खर्चे पर कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा देते हैं
अगर राज्य सरकार सक्षम नहीं तो लगाइए राष्ट्रपति शासन
अमरनाथ यात्रियों पर हमले से सारा देश गमजदा और सकते में है। पूरा देश अब सख्त से सख्त कार्रवाई चाहता है जो आतंकवादियों की आत्मा तक को हिला दे, भारत की पाक जमीन से उनके पैर पूरी तरह से उखाड़ दे। निरीह यात्रियों को मार कर इन दहशतगर्दों ने यह साफ कर दिया कि उनका एकमात्र मकसद कत्लेआम कर के देश को हिला देना है। बदनसीबी है कि सरकार की सारी कोशिशों के बावजूद वे कामयाब हो रहे हैं। इतने मारे गये फिर भी न इसके हौसले पस्त हुए ना पाकिस्तान के। वह बराबर इनकी खेप कश्मीर में भेजता ही जा रहा है और एक रक्तबीज से लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। पाकिस्तान इसलिए उछल रहा है क्योंकि हमारा चिरपरिचित दुश्मन उसकी पीठ ठोंक रहा है, उसके साथ खड़ा है। ताज्जुब है कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी अब भी मानते हैं कि पाकिस्तान से वार्ता शुरू करनी जरूरी है। एक देश आप पर बंदूक ताने है, अपने यहां से आतंकवादी भेज कर निरीह लोगों को मरवा रहा है और हाथ जोड़िए उसके आगे और कहिए कि कृपया हमसे बात कर लो।
हमारा देश सचमुच महान है, कश्मीर में जो नेता अलगाववाद का परचम बुलंद कर रहे हैं उनकी सुरक्षा पर हमारा देश हर साल तकरीबन पचास करोड़ खर्च कर रहा है। गरीब किसान छोटा-सा कर्ज लेता है तो उस पर सांसत, तरह-तरह की दबिश कुछ खाये-अघाये, अरबों में खेलते लोग बैंकों का करोड़ों डकारे बैठे हैं। अमरनाथ यात्रियों की मृत्यु पर किसी मानवाधिकार संगठन का कोई शोक संदेश मैंने नहीं सुना या पढ़ा। आपने सुना हो तो जरूर बताइएगा। वे आतंकवादियों के पक्ष में खड़े होने को ही शायद मानवाधिकार समझते हैं, इन निरीह लोगों की मृत्यु उन्हें न उद्वेलित करती है ना ही मर्माहत। सचमुच ये सच्चे मानवाधिकारी (?) हैं, हमें इन पर गर्व होना चाहिए। धऱती की जन्नत कश्मीर दोजख बना दिया गया है और कश्मीरी उसे ऐसे होते देख रहे हैं। कोई लाख कहे हम यह मानने को तैयार नहीं कि दूसरे देश से आये आतंकवादी बिना स्थानीय लोगों की मदद के रेकी कर पाते हैं और अपने निशाने तक इतने अचूक ढंग से घात लगा पाते हैं। घाटी में उनके मददगार भी उनकी तरह ही जिम्मेदार हैं। इजरायल जैसा छोटा देश आतंकवाद को कुचलने में सक्षम  हम सिर्फ बख्शेंगे नहीं, मुंहतोड़ जवाब देंगे कह कर रह जाते हैं जो यात्री मारे गये जरा उनके घर जाकर दोहराइए सरकार ये जुमले ना बैठक चाहिए न मंत्रणा, अब सिर्फ और सिर्फ डाइरेक्ट एक्शन ही चाहिए कहते हैं जून में ही सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे हमले का एलर्ट दे दिया था फिर कैसे हुई यह चूक? कश्मीर का चप्पा, चप्पा, जर्रा जर्रा छान मारिए, घर –घर में सघन तलाशी लीजिए जो भी अज्ञात व्यक्ति मिले उससे भारत का पहचान पत्र मांगिए ना दे सके या विरोध में गोलीबारी करे तो फिर या तो उसे कानून के हवाले कीजिए या फिर उसका किस्सा तत्काल वहीं खत्म कीजिए। अब यह नहीं चलेगा कि आतंकी के अंदर रिहाइशी इलाके में सेल्टर लेने और स्ट्रैटजिक पोजीशन में रह कर हमला करने का इंतजार करें वह सीमा पार करे तभी उससे निपट लें। हद हो गयी अब तो इस मुसीबत के खिलाफ निर्णायक युद्ध छेड़ने का वक्त आ गया है। कश्मीर आज दे की दुखती रह बन गया है, अब वहां पर्यटक भी जाने से डरने लगे हैं। वह दिन दूर नहीं जब पर्यटकों की आमद में जिन शिकारा वालों या अन्य लोगों की जिंदगी निर्भर है उनके सामने भूखों मरने के दिन आ जायें। है कोई जो हमारे इस स्वर्ग को बचा सके।
Shocked, stunned by the news of terrorist attack on Amarnath pilgrims in which we lost some innocent and precious lives.  Surprised no one from Human rights brigade surfaced to condemn this heinous act of crime.  I think they only sheds tear for terrorist they don’t have guts to face widows of martyred security forces Juwan’s and show sympathy for them.   
Impose president’s rule in Jammu- Kashmir as present state Government totally failed to control the situation. Enough is enough it’s time to take brave and hard decision.


No comments:

Post a Comment